बच्चे को निमोनिया कैसे ठीक करें?HealthPlanet

Posted on Fri 23rd Dec 2022 : 14:20

निमोनिया का इलाज कैसे होता है-

बैक्‍टीरियल निमोनिया के इलाज में एंटीबायोटिक की जरूरत होती है जबकि वायरल निमोनिया बिना किसी इलाज के कुछ दिनों के अंदर अपने आप ठीक हो जाता है। बच्‍चे को एंटीबायोटिक या अन्‍य कोई भी दवा डॉक्‍टर की सलाह पर ही दें। निमोनिया होने पर बच्‍चे को अपने आप खांसी की दवा न दें।

बच्चों में निमोनिया का उपचार-
निमोनिया का उपचार कितनी अच्छी तरह काम करता है यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसका कारण वायरस था या बैक्टीरिया। निमोनिया का निदान करने के लिए डॉक्टर शारीरिक परीक्षा और परीक्षणों पर भरोसा करते हैं, जिसमें छाती का एक्स-रे और रक्त परीक्षण शामिल हैं। वे फेफड़ों के संक्रमण की पुष्टि करने के लिए थूक की कल्चर का आदेश दे सकते हैं और आपके बच्चे के ऑक्सीजन के स्तर को मापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग कर सकते हैं।
यदि कोई वायरस बच्चे के निमोनिया का कारण बनता है, तो उपचार के विकल्प अधिक सीमित होते हैं। डॉक्टर आपके बच्चे के बुखार को कम रखने के लिए आराम और दवा लेने की सलाह दे सकते हैं। यह अनुशंसा की जाती है कि निमोनिया वाले बच्चों को कोडीन या डेक्सट्रोमेथॉर्फ़न के साथ कफ सप्रेसेंट न दें। खांसी अतिरिक्त बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है और फेफड़ों को साफ करती है।
ऐसी परिस्थितियों में जब बैक्टीरिया निमोनिया का कारण बनते हैं, एंटीबायोटिक्स उपयोगी हो सकते हैं। यदि आपका डॉक्टर आपके बच्चे के निमोनिया के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स निर्धारित करता है, तो आपको अनुशंसित खुराक जितनी बार आपका डॉक्टर आपको बताए उतनी बार देनी चाहिए। एक बार जब आपके बच्चे ने सुधार दिखाया है तो उनका उपयोग बंद करने के प्रलोभन से बचें। बैक्टीरिया अभी भी आपके बच्चे के फेफड़ों में हो सकता है, और यदि आप अपने बच्चे को एंटीबायोटिक्स देना बंद कर देते हैं, तो निमोनिया वापस आ सकता है।


बच्चे को निमोनिया से बचाने के लिए मैं क्या कर सकती हूं?
बच्चे के स्वस्थ रहने और उसके निमोनिया होने की संभावनाओं को कम करने के लिए निम्नांकित कदम जरुरी हैं:

सबसे जरुरी है कि उसका संपूर्ण टीकाकरण हो। न्यूमोकोकल टीका (पीसीवी) निमोनिया, मेनिंजाइटिस और सेप्टिसीमिया रक्त विषाक्तता के कुछ मामलों के प्रति सुरक्षा प्रदान करता है। एच.आई.बी., डिप्थीरिया और काली खांसी के टीके, निमोनिया पैदा करने वाली सभी बीमारियों से बचाव के लिए बहुत जरुरी हैं।
व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दें। खांसते हुए अपने मुंह और नाक को ढक लें। कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए अपने और अपने बच्चों के हाथ बार-बार धोते रहें। यदि आपके घर में कामवाली या आया शिशु की देखभाल करती है, तो सुनिश्चित करें कि वह भी स्वच्छ रहती हो।
धुआं रहित वातावरण हो। यदि आप या आपके पति धुम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ने की कोशिश करें। सिगरेट के धुएं के आसपास रहने वाले बच्चे ज्यादा बीमार पड़ते हैं, और उन्हें निमोनिया, सर्दी-जुकाम, अस्थमा और कान के संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता है।
सुनिश्चित करें कि शिशु को पर्याप्त पोषण मिले। शिशु को पहले छह महीनों तक अनन्य स्तनपान करवाना उसकी विकसित हो रही प्रतिरक्षण प्रणाली को सहारा देने का सबसे बेहतर तरीका है। आपके स्तनदूध में एंटीबॉडीज होती हैं जिनका उत्पादन आपका शरीर करता है। अभी जब शिशु की प्रतिरक्षण प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती तब भी ये एंटीबॉडीज संक्रमणों से लड़ने में शिशु की मदद करती हैं। जब आप शिशु को ठोस आहार खिलाना शुरु करती हैं, तो जब तक वह पूरी तरह स्तनपान नहीं छोड़ देता तब तक स्तनदूध पोषक तत्वों और एंटीबॉडीज का महत्वपूर्ण स्त्रोत रहेगा।
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। जिस दिनों वायरल इनफेक्शन अधिक फैल रहा हो, उस समय जहां तक संभव हो शिशु को भीड़ भरे स्थानों या चारों तरफ से बंद जगहों पर न लेकर जाएं।

अगर, आपका शिशु समय से पहले (प्रीमैच्योर) पैदा हुआ था, तो आपको शुरुआत से ही उसकी अतिरिक्त देखभाल करनी होगी। समय से पहले जन्मे शिशुओं की प्रतिरक्षण प्रणाली कमजोर होती है, इसलिए उन्हें संक्रमणों का खतरा ज्यादा होता है।

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